शनिवार, 28 दिसंबर 2013

मिथिलाक चतुथ॔ नाम तिरहुतः कि॓एक..?

मिथिलाक चतुथ॔ नाम तिरहुतः कि॓एक..?

वि० पु०....  

 "गण्डकी तीर मारम्भ चम्पारण्यान्तकं शिवे । 
 विदेह भूः समाख्याता तिरभुक्त मिथः मनुः ।।"
 रामायणः...जेहि तिरहुति तेहि समय निहारी । 
 तेहि लघु लगे भुवन दश चारी ।
 जो सम्पदा निज गृह शोहा ।
सो विलोकि सुरनायक मोहा ।।


१, तीर भुक्त " ऋगवेद, सामवेद, यजुवे॔द" तीनू वेद सँ जतय ब़ाह्मण आहुति दैत होइथ से तीरभुक्त तिरहुत भेल ।


२. तृनाम "शाम्भवी, स्वण॔कानन, तपोवन" सँ भुक्तवान अछि जे प़देश से भेल तिरहुत ।


३. कौशकी, गंगा,तथा गंडक तीर तक भुक्तवान "शेष अछि सीमा जाहि देशक" तकरे तिरहुत कहल जाइत अछि ।


४. तीन गुण "सत्व, रज, तम" आर तीन देव "ब़ह्मा, विष्णु, महेश" सँ भाज्यमान जे देश से भेल तिरहुत ।


५. त्रिराम "वलराम, परशुराम, राम" भुगत भेल हो जाि देश में से भेल तिरहुत ।


६. तृसमिर "शितल, मन्द, सुगन्ध" जतय भोगल जाइत हो से भेल तिरहुत ।


• वाणी कुप सरित सर नाना ।
• सलिल सुधा सम मणि सोपाणा ।
• गुँजत माजु मात्र रस भृंगा ।
• कुजत कल वहु वरण विहंगा ।।


७. तृमत "द्वैत, अद्वैत, विशिष्टद्वैत" भुक्तवान अछि जाहि देश में ओहि देश के तृभुक्त अथा॔त तिरहुत कहल जाइत अछि 


८. चारि वस्तु " धम॔, अथ॔, काम, मोक्ष" में सँ तीन वस्तु "धम॔, अथ॔, मोक्ष" जतय भोगल जाईत हो ताहि देश के तृभुक्त कहल जाइत अछि आ से भेल तिरहुत ।

९. तृताप "दैहिक, दैविक, भौतिक" भुक्तवान अथा॔त समाप्त कएनिहार जे देश तकरा तिरहुत कहल जाइत अछि ।


१०. तृविधकम॔ "संचित, प़ारब्ध, क़ियामाण" मे निष्ठा राखि भोगैत छथि जे देश ताहि देश के तिरहुत कहल जाइत अछि ।

     


जीव कान्त मिश्र, 

अड़ेर,मधुवनी, मिथिला

महासचिव विद्यापति परिषद्,


 सिन्दरी,धनवाद,झारखण्ड

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