मंगलवार, 22 दिसंबर 2015
गजल
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एके बेर ओ मारूक मुस्की मारि गेलै हम नै बुझलियै आ ई करेजा हारि गेलै चंचल मोन आसक दीप कहियो नै जरेलक प्रेमक खड़रि माचिस ओकरा ओ बारि गेलै ...
गजल
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आँखिक मस्ती जे अपन ओ पिया देलक बिनु पीने हमरा शराबी बना देलक सम्हारल छल ई करेजा बहुत जतनसँ नैनक संकेतसँ गगनमे उड़ा देलक अनका नचबैमे ...
SUNDAR KAND PATH
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सुन्दर काण्ड पाठ श्रीजानकीवल्लभो विजयते श्रीरामचरितमानस पञ्चम सोपान सुन्दरकाण्ड - श्लोक शान्तं शाश्वतमप्...
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