गुरुवार, 9 अप्रैल 2020

नैन अहाँ केर अछि मधुशाला ।। गीतकार - दिनेश झा "माधव"

                 ।। मैथिली गजल ।।
        


मणि मानिक सन चम चम काया , चमकैत पुनम चान ।
नैन अहाँ केर अछि मधुशाला , मन मोहक  मुस्कान ।।
       मणि मानिक सन ............।।
  घन घनघोर घटा सन कारी ,घुरमल घुरमल  केश ।
मद मातल मद मस्त जवानी , कामिनी  काम सनेश ।
 गजगामिनी मन मोहनी मुरति, स्वर्ग परी सन भेश ।
  पिक बैनी मृगलोचनी  सुन्नरि , सौंदर्यक छी खान ।
 नैन अहाँ केर अछि मधुशाला , मुख मोहक मुस्कान ।
        मणि मानिक सन............।। 
चंचल चितवन चन्द्र चकोरी , सुगना  जईसन ठोर ।
 लाल गुलाब गाल अहाँ कअ , नमगर नाकक कोर ।
  हिरणी जईसन चालि चलै छी , बान्हल प्रितक डोर ।
   पातर पातर डार लचका  कअ , छोड़लौं प्रेमक बाण।
नैन अहाँ केर अछि मधुशाला , मुख मोहक  मुस्कान ।।
        मणि मानिक सन..............।।
 खन खन बाजे  कँगन कर में ,पग पायल केर शोर । 
 नाक नकवेसर  झुमका टीका,  अँग अँग भुषण तोर ।
 सोरहो सिंगार बत्तिसो अभरण , रमणी रूप बेजोड़ ।
  लिखल छन्द " माधव " सुनु दामिनी ,प्रित भरल ई गान ।
   नैन अहाँ केर अछि मधुशाला , मुख मोहक मुस्कान ।
         मणि मानिक सन............।।

 ---------   गीतकार दिनेश झा " माधव "
           सझुआर , बेनीपुर , दरभंगा , मिथिला
                      8369384585

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