मंगलवार, 4 अगस्त 2015

पंचमी पाबनि

पंचमी पाबनि 



इ मौना पंचमी  छल | एकरा नाग पंचमी सेहो कहल जाइत छै | अजुका दिन मिथिला मे माटिक थुम्हा बनाक' घरे घर राखल जाइत अछि | कुलदेवी के पातरि देल जाइत छनि |भोरे भोर नीमक पात आ नेबो खयबाक परंपरा थिक | साँपक प्रकोप सँ बचबाक लेल मूसक माँटि मंत्रिया क' घर सब मे छीटल जाइत अछि | घरक' धुरखा सब पर गोबर सँ नाग नागिन के चित्र बनौल जाइत अछि |आइ मिथिलाक प्रायः सब घर मे खीर आ घोरजाउर बनिते अछि |ई पाबनि बहुत लोक के अगिला पंचमी मे होइत अछि जकरा लगपाँचे के नाम सँ जानल जाइत अछि | 

  मिथिलाक नवविवाहिता लोकनिक   प्रसिद्ध पाबनि मधुश्रावणी पूजब सेहो आइये सँ आरंभ भेल जे अगिला तृतीया धरि चलत | एहिमे नव विवाहिता लोकनि फूल लोढ़ि क' महादेव,गौरी,नाग नागिन आदि देवी देवताक पूजन अपन सोहागक रक्षार्थ करै छथि |मधुश्रावणी पाबनि सामान्यतया मैथिल ब्राह्मण आ कर्ण कायस्थ परिवार मे प्रचलित अछि |

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