dahej mukt mithila

(एकमात्र संकल्‍प ध्‍यान मे-मिथिला राज्‍य हो संविधान मे) अप्पन गाम घरक ढंग ,अप्पन रहन - सहन के संग,अप्पन गाम-अप्पन बात में अपनेक सब के स्वागत अछि!अपन गाम -अपन घरअप्पन ज्ञान आ अप्पन संस्कारक सँग किछु कहबाक एकटा छोटछिन प्रयास अछि! हरेक मिथिला वाशी ईहा कहैत अछि... छी मैथिल मिथिला करे शंतान, जत्य रही ओ छी मिथिले धाम, याद रखु बस अप्पन गाम - अप्पन बात ,अप्पन मान " जय मैथिल जय मिथिला धाम" "स्वर्ग सं सुन्दर अपन गाम" E-mail: apangaamghar@gmail.com,madankumarthakur@gmail.com mo-9312460150

बुधवार, 29 अप्रैल 2015

सीता-नवमी

सीता-नवमी











एक समय के बात थिक
त्रेता युग में राजा छलथि शिरध्वज
समस्त मिथिला में परल छल अकाल

चारु दिशा मचल छल हाहाकार
प्रजा सभ छल हकासल उदास
यज्ञ, जाप, पूजा, होमादि होमय लागल
तखन राजगुरु शतानन्दजी देलनि आदेश 
गुरुक आज्ञानुसार शिरध्वज उठि
लेलन्हि कान्हपर हर विदा भेलाह खेत
बरद जोति हरमें बन्हलनि आँतर 
लागनि पकरिते शिराउर में अभरल
हरक नाश में मटकुरी लागल छल
तखने माय वसुन्धराक कोखिसँ
उत्पन्न भेलथि पद्महस्त लेने सीता
खिलखिलाइत हँसैत मटकुर सँ बहरेली
वैशाख शुक्ल पक्षक नवमी संगहि
शुभ मंगल दिन छलैक
उत्तर फाल्गुनी नक्षत्रक योग
समूचा नगर भरि मचि गेल शोर
खुशी सँ नगरवासी झूमय लागल
हुनकहि कंठ सँ निकसलि मैथिली
सुन्दर मिठगर मैथिली भाषा बोली
वैह छथि वैदेही, जानकी, मैथिली, सीता
हुनकहि छन्हि आई जन्मदिवस
आउ समस्त मिथिलावासी मनावी
हर्षोल्लासक संग धियाक सीता नवमी

मंगल शुभकामनाक संग-

 
अमरनाथ मिश्र' भटसिमरि
जय मिथिला जयति मैथिली

सोमवार, 27 अप्रैल 2015

जय माँ जानकी -

ॐ   द्यौ:   शान्तिरन्तरिक्षँ  शान्ति:     पृथिवी  शान्तिराप:   शान्तिरोषधय:    शान्तिः। 
वनस्पतये: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति: सर्वँ शान्ति: शान्तिरेव शान्ति: सा मा शान्तिरेधि॥ 

ॐ शान्ति: शान्ति: शान्तिः॥  

     य माँ जानकी  , 
मिथिला एक बेर भयंकर अकाल परि गेल,प्रजा सब मे हाहाकार मचि गलैक । चारु तरफ यग्ञ्य होम पूजा पाठ होमय लागल मुदा वर्षा नहि भेल तहन मिथिला नरेश राजा जनक अप्पन गुरू शतानन्द महाराज केर आग्या स हल चलायब शुरू कयलनि कहल जाइछ जे पुनैारागढ सीतामढी मे भूमि स हरक ठोकर स एकटा नवजात कन्या भेटलनि जनिकर नाम सीता,जानकी,वैदेही,मैथिली परलनि तकर बाद मिथिला मे खुब पानि भेल, राजा जनक सेहो मिथिला मे सीता के पाबि गदगद भेलाह विदेह रहितो सगुण रुप के अनुभूति मे आनंनदित भेलाह
  मिथिलावासी के लेल आजूक दिन अविस्मरणीय अछि । जानकी नवमी, मैथिली दिवस पर मातृभाषा के    समबर्द्धन करी
       माता सीता लक्ष्मीक अवतार छलीह।लक्ष्मी पद्मासना छथि आ' सीता पद्महस्ता।सीताक आँचर सुलटा छनि।सीतारामक मूर्ति सोझ होइत अछि।सीताक आयुध कहियो धनुष नहि रहलनि। उल्टा आँचर,धनुर्धरी,कैटवाक करैत माता सीताक दोखाह चित्रक प्रचार शास्त्र-बिरुद्ध अछि। कम सं कम दूटा दृष्टांत पर ध्यान दीः---
अथ लोकेश्वरी लक्ष्मीर्जनकस्य पुरे स्वतः।
शुभ क्षेत्रे हलोत्खाते तारे च उत्तर फाल्गुने।।
अयोनिजा पद्मकारा वालार्क शतसन्निभा।
सीतामुखे समुत्पन्ना वालभावेन सुंदरी।

  पद्म पुराण -  अर्थः---साक्षात् लक्ष्मी महर्षि जनकक नगरी मिथिला मे वैशाख शुक्ल नवमी शुभ मंगल दिन उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र मे शुभ क्षेत्र मे हर'क द्वारा उत्खनन सं अयोनिजा हाथ मे कमल रखने शताधिक बाल सूर्य केर सदृश उत्तरायण काल मे उत्पन्न भेली।(2)जानामि राघवं विष्णुं लक्ष्मी जानामि जानकीम् ।ज्ञात्वैव जानकी सीता मया नीता वनाद् बलात्।।-आध्यात्म रामायण।रावण द्वारा मंदोदरी केँ कहल गेल।अर्थ साफ अछि।कहबाक तात्पर्य जे बिना शास्त्रक मत जनने माता सीताक रूपक संबंध मे कृत्रिम वाद स्थापित करब आध्यात्मिक अपराध अछि।राजा जनक बहुतो भेलाह तहिना सब जनकक पुत्री जानकी कहबैत छथि मुदा, सीता ओ भेलीह जे हरक सिराउर सं प्रकट भेलीह।हमसब सीतानवमी मनबैत छी।चूँकि, सीता सेहो जानकी छलीह तेँ,हिनको लेल जानकी नवमी अनुपयुक्त नहि मुदा, मिथिलावासी सीतानवमी मनबैत छथि। सीतारामक निम्नांकित मूर्तिक पूजा शास्त्र सम्मत अछिः-

सीता माताक आरती.

सीता बिराजथि मिथिला धाम सब मिलिके करियनु आरती
संगहि सुशोभित लछुमन राम सब मिलिके करियनु आरती।।

बिपदा विनाशिनि सुखदा चराचर,सीता धिया बनि अयली सुनयना घर
मिथिलाके महिमा महान।। सब मिलिके करियनु आरती.....
सीता सर्वेश्वरि ममता सरोवर,बामा कमल कर दायाँ अभय वर
सौम्या सकल गुणधाम।। सब मिलिके करियनु आरती.....
रामप्रिया सर्व मंगलदायिनि,सीता सकल जगती दुःखहारिणि
करथिन सभक कल्याण।। सब मिलिके करियनु आरती...
सीतारामक जोड़ी अति मनभावन,नइहर सासुर कयलनि पावन
सेवक छथि हनुमान।। सब मिलिके करियनु आरती.....
ममतामयी माता सीता पुनीता.संतन हेतु सीता सदिखन सुनीता
धरणी सुता सबठाम।। सब मिलिके करियनु आरती..
शुक्ल नवमी तिथि बैशाख मासे, ”चंद्रमणि” सियाजीके उत्स


जय मिथिला जय जय मैथिली
जानकी नौमी के  हार्दिक शुभकामनाए -

शनिवार, 25 अप्रैल 2015

वाक- कला पर आधारित नियमित श्रृख्लांक - 6.

नमस्कार  --  हम मनोज पाठक 

वाक कला पर आधारित नियमित साप्ताहिक लेखमालाक 6 कड़ी। एकर ऑडियो फाइल सेहो उपलब्ध अछि। सुनबाक लेल अपन मेल आइ डी पठाऊ। लेख उपयोगी लागय , एकरा आगाँ फॉरवर्ड करू। सुदीर्घ बनाऊ सांस, जोड़ू जीवनक डोर निखारू अपन वाक कला
    अवाजक हार्डवेयर सॉफ्टवेयर पर विचारक क्रममे आइ हमरा लोकनि Deep Breathing Technique यानि साँस लेबाक ओहि तकनीक पर विचार जारी राखब जाहिसँ अपार लाभ प्रत्येक व्यक्तिकेँ , सकैत छैक जँ प्रतिपल व्यक्ति ढंग सँ मात्र साँस लेनाइ छोड़नाइ सीख लै।
आई कनेक आर विस्तारसँ साँस लेबा पर हमरा लोकनि विचार , रहल छी, कारण जे सहज उपलब्ध अछि मुदा अज्ञान, आलस, कमजोर इच्छाशक्ति वा प्रारब्धक चलते जँ कोनो व्यक्ति अपन प्रदर्शनसँ असंतुष्ट छथि वा अपनाकें कमजोर बुझैत छथि वा हुनक तन मनक स्वास्थ्य हुनक इच्छाक अनुरूप नहि छनि जाहिसँ वाककलाक इच्छित शिखर तक पहुँच सकथि तँ दायित्व एहि पंक्तिक रचनाकारक छैक जे अपन संपर्कमे अबैवला एहेन व्यक्तिक लेल उचित पथ प्रदर्शक बनि सकय।
    साँस जीवनक लेल आवश्यक अछि। सफलताक उच्चतम शिखर तक शीघ्र पहुँचैमे साँसक संतुलित प्रयोग कम समयमे अप्रत्याशित रूपसँ लाभ पहुँचबैत छैक। ज्ञान सुदीर्घ अवधिसँ भारत वर्षमे उपलब्ध अछि मुदा एकर सायास प्रयोग अज्ञानक चलते कम लोक करैत छथि। जिनका ज्ञान छनि प्रारब्धके चलते नहि , पबैत छथि। जँ एहन व्यक्ति अपन प्रारब्ध के चुनौती देथि तँ ओहो अपन प्रारब्ध के बदलि सकैत छथि इच्छित लक्ष्य पाबि सकैत छथि।
   अहाँ अहि क्षण, अपन आयुवर्गक कोनो दशकमे होई, जँ अहाँ चाही तँ अपन साँस लेबाक अभ्यास धीरे-धीरे बदलि सकैत छी एकरा नीक बना सकैत छी। किशोरावस्था बीतलाक बाद साँसक नियमित अभ्यास मात्र 5 मिनटक लेल प्रतिदिन केलासँ वा प्रतिपल Deep Breathing केलासँ
1. तन स्वस्थ रहै छैक
2. रोग प्रतिरोधक क्षमता उच्चतम स्तर पर रहैत छैक
3. स्मरण शक्ति प्रबल रहैत छैक
4. दिमागमे याद , , राखल प्रत्येक स्मृति आवश्यकता पड़ला पर अनायास बजबा काल वा लिखबा काल पहिनेसँ फुराइत रहैत छैक।
5. वाक अंग स्वस्थ रहलासँ बजबाकाल स्पष्टतासँ विचार श्रोताक समक्ष रखबामे कोनो अवरोध नहि अबैत छैक।
    साँस लेबाक क्रिया अनैच्छिक अछि सत्य अछि मुदा एहि अनैच्छिक क्रियाकें अपन आवश्यकतानुसार बढ़ाओल जा सकैत अछि इहो सत्य अछि। मात्र योगी नहि, बल्कि भोगी सेहो अपन साँस के नियंत्रित , , एकर मात्रा बढ़ा सकैत छथि। 
खेलाड़ी, पर्वतारोही शारीरिक रूपसं बेसी सक्रिय लोकक सांस लेबाक क्षमता बढ़ल रहैत छनि। अपन Deep Breathing Breathing Technique के चलते आन प्रतिस्पर्धीसँ आगाँ निकलि जाइत छथि।
तनमे नियंत्रित रूपमे बेसी मात्रामे प्राणवायुक प्रवेश भेलासँ शरीरक प्रत्येक अंगकें उच्च गुणवत्तावला पोषक ऑक्सीजन पहुँचैत छैक जाहिसँ अंगक कार्यक्षमता बढ़ैत छैक। ठीक तहिना नियंत्रित रूपसँ प्रतिपल साँस छोड़लासँ शरीरक टॉक्सिनयुक्त वायु कार्बनडाइऑक्साइडके संग बाहर निकलि जाइत छैक। मात्र Deep Breathing Technique अपना लेलासँ लाभ हर व्यक्तिकें भेटैत छैक।
    अहाँ जँ Deep Breathing नहि करैत छी, , एखनो कोनो देर नहि भेल अछि। एहि पलसँ शुरू दियौ। एहि पाँतिके पढ़ैतपढ़ैत सेहो अहाँ Deep Breathing सकैत छी। एकदम धीरे धीरे सांस लिय, अनुभव करू जे प्राणवायु अहाँक भीतर आबि रहल अछि। एकदम हल्लुके हल्लुके साँसके आबय दियौक। अहाँक आँखि एहि पाँति पर रहय वा जँ अहाँ पोस्ट सुनि रहल छी तँ आँखि मूनि लिय, प्राणवायुकें अपन नाकक दूनू पूरासँ धीरे धीरे ऊपर आबय दियौ। प्राण वायु छैक। अहाँक आयु बढ़ाओत। आब, दियौक, जतेक आबि सकय। सहजतासँ आबय दियौक।
    जखन लागय जे एहिसँ बेसी वायु एक साँसमे नहि आबि सकैत अछि , सहजतासँ वायुके बाहर निकलय दियौक। वायु रोकबाक कोनो प्रयास नहि करू। जहिना धीरे धीरे आयल छल ठीक तहिना धीरे- धीरे निकलय दियौक। बस साँस लेबाक छोड़बाक एहि प्रक्रियाके अहाँ पाँच वा दस साँस तक प्रतिदिन मात्र एक सप्ताह करी , आश्चर्यजनक लाभ अपने बुझबामे आओत। जँ नहि करब बस पढ़िक रहि जायब वा सुनैत रहब , कोनो लाभ नहि होयत। जे कएलासँ अनुभव होइत छैक पढ़िक वा सुनिक, नहि प्राप्त कएल जा सकैत अछि।
किछु लोक अपन आयुक शुरूआती अवस्थामे एकर अनुभव केने रहैत छथि Deep Breathing Deep Breathing Technique सँ नीक जकाँ परिचित रहैत छथि मुदा बादमे Profession बदलि गेलासँ वा अपन प्रारब्धक चलते एकरा जारी नहि राखि पबैत छथि एहनामे अपन अरजल अनुभव अभ्यास हेरा जाइत अछि 45 वर्षक बाद जखन शरीर प्रौढ़ , , अन्ततः अवसान दिस अग्रसर होइत अछि तँ तरह-तरहके बीमारीक शिकार तन मन होइत अछि।
     मुदा एहनो लोक फेरसँ अपन साँस लेबाक तकनीक बदलि , Deep Breathing Technique अपना , पहिने स्वास्थ्य तकर बाद बल अर्जित , , इच्छित लक्ष्य प्राप्त , सकैत छथि। जँ युवावस्थामे Deep Breathing Technique सीखि लेल जाय प्रतिदिन मात्र 5 मिनट साँसक अभ्यास कएल जाय वा प्रतिपल Deep Breathing Technique सँ साँस लेल छोड़ल जाय तँ एहन व्यक्ति जीवन पर्यंत स्वस्थ रहताह, अपन कर्मसँ संतुष्ट उपलब्धि सँ प्रसन्न रहताह।
    तन स्वस्थ, कर्म संतोषप्रद उपलब्धि यथेष्ट रखबामे साँस कोना किएक सहायक होइत छै से बुझबाक लेल अपन तन मनक संरचनासँ परिचित भेनाई आवश्यक अछि। एकर ज्ञान अहाँ कोनो पोथी वा माध्यमसँ सरलतासँ प्राप्त , सकैत छी। एत, बस साँस वाककला पर ध्यान केन्द्रित रखैत जनतब देल जा रहल अछि।
    नीक स्वर ध्वनि स्पष्ट विचारक लेल अहाँ जतेक बेसी गुणवत्तापूर्ण ऑक्सीजन अपन फेफड़ामे लैत छी ओतेक बेसी लाभ होइत अछि। प्रत्येक व्यक्तिक शरीरमे छातीक पसलीसँ घेरायल दू गोट फेफड़ा रहैत अछि। प्रत्येक फेफड़ामे लगभग 30 करोड़ छोट- छोट वायु प्रकोष्ठ ( Air Bags) अछि।
   नाकसँ घीचल गेल प्राणवायु एतहि पहुँचैत अछि रक्त परिशुद्धीकरण प्रक्रिया संपन्न होइत अछि। पोषक पदार्थ अवशोषित भेलाक बाद अशुद्ध रक्तक संग शरीरक अनावश्यक पदार्थ सूक्ष्म वायु रूपमे एतए अबैत अछि घुरती सांसक संग बाहर निकलि जाइत अछि। रक्तमे प्राणवायु ऑक्सीजन खूब नीक जकाँ घुलैत मिलैत अछि नव ऊर्जा स्फूर्तिसँ भरल पोषक रक्त शुद्ध भए , हृदयमे पहुँचैत अछि। हृदय एकरा आगाँ पूरा शरीरमे पठा दैत छैक। एहि तरहे शरीर स्वस्थ रखबामे सहायक दू महत्वपूर्ण तंत्र एक दोसराक सहयोग करैत अछि।
     मानव शरीरक त्वचा जतेक स्थान घेरैत अछि ओकर तुलनामे फेफड़ाक Air Bags 40 सँ पचास गुना बेसी स्थान घैरैत अछि। जँ जमीन पर पसारिकए एकरा राखल जाय तँ Air Bags 80 सँ , , 100 वर्ग गजमे पसरि जायत। जखन कियो व्यक्ति धीरे- धीरे देर तक साँस घीचैत अछि तँ ओकर शरीर तंत्रमे अधिक मात्रामे प्राणवायु पहुँचैत छैक धीरे धीरे देर तक साँस छोड़ैत अछि तँ ओकर शरीरक सूक्ष्म विषाक्त अनावश्यक पदार्थ बाहर निकलि जाइत छैक। व्यक्ति अपन साँसके असीमित विस्तार दए सकैत अछि आवश्यकतानुसार एकर उपयोग , सकैत अछि।
     ई सब जनतब अहाँ तक पहुँचेबाक लक्ष्य मात्र एतबे टा अछि जे जँ अहाँ जनतबक अभावमे Deep Breathing नहि करैत छी तँ आबो शुरू करू , जँ प्रारब्ध प्रभावमे Deep Breathing नहि कए पाबि रहल छी तँ अपन प्रारब्धके बदलबाक लेल अपन साँसक प्रयोग एकटा अचूक औजार के रूपमे करू।  सामान्यतः एक मिनटमे औसतन 10 सँ 20 बेर हम अहाँ साँस लैत छी। किछु लोक एक मिनटमे 25 सँ , , 40 बेर धरि साँस लैत छोड़ैत छथि। साँस बहुत जल्दी लै छोड़ैवला लोक बीमारीसँ बेसी ग्रस्त होइत छथि। एहन लोकक अवाज हल्लुक रहैत छनि। साँस संबंधी रोग हिनका बेसी काल तंग करैत छनि।
    एहनो लोक जँ अपन साँस लेबाक प्रक्रिया पर ध्यान देथि तँ अल्प समयमे बहुत बेसी लाभान्वित , सकैत छथि। साँसक नियमित अभ्यास सँ एक दिस अवाजमे ओज बढ़तैन तँ दोसर दिस तनमे बल बढ़तैन , शरीरमे बल बढ़लासँ अपन लक्ष्य द्रुत गतिसँ प्राप्त करताह। एक साँसमे औसतन 500 घन सेंटीमीटर प्राणवायु भीतर जाइत अछि। एतबे साँस लेलासँ जीवनक सबटा काज सहजतासँ चलैत रहैत अछि। मुदा नियमित Deep Breathing सँ प्रत्येक साँसमे आसानीसँ 3000 घनसेंटीमीटर तक प्राणवायु अपन फेफड़ामे पहुँचाओल जा सकैत अछि। प्रति मिनट साँस लेबाक गति घटि, जाइत छैक। गति घटलासँ उच्च गुणवत्ताक प्राणवायु देर तक फेफड़ामे रहैत अछि रक्तमे नीक जकाँ घुलैत मिलैत अछि। दोसर दिस शरीर सँ बाहर निकालल जायवला अनावश्यक विषाक्त वायु शरीर सँ बाहर पूरा पूरा निकलि जाइत अछि।     
प्रत्येक साँसक 40% ऑक्सीजन सोझेसोझ दिमाग तक पहुँचैत अछि। बहुत बेसी ध्यान दै वला हर पल याद रखैवला तथ्य अछि। अहाँ जतबे साँस , रहल छी कम वा बेसी, 40 प्रतिशत मस्तिष्क कें पहुँचि रहल छैक। शरीरक प्रत्येक ज्ञात अज्ञात काजक नियंत्रण, सूचनाक आदानप्रदान, स्मृतिक भंडारण एकर यथासमय आवश्यकतानुसार प्रयोग एतहिसँ होइत छैक तँए प्रत्येक साँसक लगभग आधासँ कनिए कम यानि 40 प्रतिशत एकरा चाहबे करियैक।
    जखन अहाँ Deep Breathing कए , साँसक माध्यमसँ अपना शरीरमे प्राणवायुक मात्रा बढ़ा दैत छियैक तँ दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन लगातार पहुँचैत रहैत छैक। दिमागक प्रत्येक कोष के ओकर आवश्यकतानुसार खोराक भेटैत छैक। स्मृति सम्हारि कए रखबाक एकर प्रयोग आवश्यकतानुसार करबाक सामर्थ्य बढ़ैत छैक। एहनामे जखन अहाँ बजबाक इच्छा करैत छी वा लिखबा, पढ़बाक काज करैत छी तँ अहाँ बेसी ऊर्जावान रूपसँ अपन काज ,पबैत छी।
प्राणवायुके नियंत्रित रूपमे शरीरमे आपूर्ति करबाक क्षमता अहाँ जतेक बढ़बैत छी ओही अनुपातमे अहाँक शरीरक प्रत्येक अंगक कार्यक्षमता बढ़ैत अछि। कारण दिमाग जकाँ शरीरक प्रत्येक तंत्रक नियंत्रक अंगके ऑक्सीजनक आपूर्ति निश्चित मात्रामे चाही Deep Breathing सँ उच्च गुणवत्तावला ऑक्सीजन सुचारू रूपसँ ओत धरि अबाध गतिसँ पहुँचैत छैक। तंत्रिका तंत्रक नियंत्रक दिमाग, रक्त संचार तंत्रक नियंत्रक हृदय, श्वसन तंत्रक नियंत्रक फेफड़ा, उत्सर्जन तंत्रक  नियंत्रक किडनी, एहिना प्रत्येक अंग प्रत्यंगमे पर्याप्त प्राणवायु पहुँचबाक लाभ शरीरक स्वामी ओहि व्यक्तिकें अनायास होइत छैक।
    जखन अहाँ साँस लैत छी , फेफड़ाक पसार पर ध्यान दियौ। फेफड़ाक छोटछोट कोष यानि Air Bags मे प्राणवायु भरैत छैक तँ प्रत्येक कोष Air Bag बैलून जकाँ फूलैत अछि। फुलबासँ एकरा सभक आकार बढ़ैत छैक आकार बढ़लासँ पूरा फेफड़ा पसरैत अछि। फेफड़ा क्षैतिज रूपसँ लंबवत रूपसँ पसरि सकैत अछि। क्षैतिज रूपसँ फेफड़ा पसरनाई माने छातीक पसलीक पसरनाई। एकरा साँस एखने घीचिकए अनुभव , सकैत छी। जे व्यक्ति शारीरिक श्रम बेसी करैत छथि, भाग दौड़ वला काज छनि, खेलाड़ी छथि, फौजमे वा पुलिस बलमे कार्यरत छथि हुनका अचानक तेज गतिसँ साँस देर तक लेबाक आवश्यकता कखनो पड़ि सकैत छनि एहनामे फेफड़ाक पसार क्षैतिज रूपमे करबाक अभ्यास हेबाक चाही।
   रक्षा बलक नौकरीमे तँए अनिवार्यरूपसँ छातीक पसलीक पसार कम सँ कम पाँच सेंटीमीटर वा एक निश्चित मानदंड तक भेनाइ अनिवार्य रहैत छैक। कारण तेज गतिसँ दिमाग शरीरक अंग-प्रत्यंग तक प्राणवायु पहुँचबाक क्षमता जाहि तनके नहि रहतैक ओकर शरीर एहि काजमे ठठि नहि सकत।फेफड़ाक पसार लंबवत रखनाइ मानसिक श्रम अधिक करैवला व्यक्तिक लेल बेसी लाभप्रद होइत अछि। फेफड़ाक एहि पसारक सेहो अनुभव , , देखू। वाककलासँ आजीविका चलबैवला व्यक्तिकें सायास अपन सांस सुदीर्घ करबाक प्रयास करबाक चाही छातीक पसार लंबवत रखनाइ सीखबाक चाही।
   साँस एखन , , देखू। फेफड़ा पाचन तंत्रके अलग करैवला मांसपेशीक परत तन्तुपट ( Diaphragm) कहबैत अछि। जँ अहाँ उच्च गुणवत्तावला अवाज चाहैत छी तँ अहाँके अपन साँस लेबाक तकनीकमे Diaphragm तक साँसक पसार करैये पड़त।
      असलमे फेफड़ाक प्रत्येक Air Bag मे अहाँ प्राणवायु पहुँचाब चाही , अहाँके फेफड़ाक पसार लंबवत करय पड़त। बेसी देर तक साँस घीचि कए , अधिक मात्रामे प्राणवायु लए ,
Diaphragm के अहाँके नीचाँ दिस आवश्यकतानुसार ठेल सकैत छी जखन कि पसलीक पसार एक सीमासँ बेसी नहि कए सकैत छी। Diaphragm के आगाँ नींचा दिस पेट अछि। खाली स्थान एतए बेसी उपलब्ध अछि तँए एकरा आर नीचाँ दिस धकेलल जा सकैत अछि, अधिक प्राणवायुक लेल फेफड़ाक बेसी सँ बेसी प्रकोष्ठकें Air Bags भरल जा सकैत अछि।
     खेलाड़ी वा फौजी भगबा काल तेज गतिसँ साँस लैत छोड़ैत छथि। हिनका पसलीए चलाक साँस लेबाक आवश्यकता छनि। बेसी मात्रामे प्राणवायु नहि अपितु तेज गतिसँ प्राणवायुक आपूर्तिक शरीरक प्रत्येक अंगमे जरूरति छनि। एकर तेज गति पसलीए चलाक मेनटेन कएल जा सकैत अछि। जखन कि ऑफिसमे बैसि , काज करैवला व्यक्तिके वा बजबासँ संबधित काज मुख्य रूपसँ करै वला व्यक्तिके साँस आराम आराम सँ शरीरक प्रत्येक अंग प्रत्यंग तक पहुँचेबाक आवश्यकता छनि । तँए दूनू तरहक काज करैवला व्यक्तिक आवश्यकता फराक अछि।   तथ्य बुझिकए जखन अहाँ अपन साँस लेबाक आवश्यकता निर्धारित करैत छी अपन साँस सुदीर्घ करैत छी तँ अपार लाभ होइत अछि।
    ई पोस्ट कने नमहर भए गेल। कने उबाऊ,थोड़े पकाऊ बहुत बेसी थकाऊ सेहो लागि सकैत अछि। मुदा ध्यान राखू जँ अहाँ आब जनतब भेलाक बादो अपन साँस सुदीर्घ करबाक लेल प्रयास नहि करैत छी तँ प्रारब्धक दोष अछि। जनिक प्रारब्ध प्रबल छनि अवाज कमजोर रहब भाग्यमे लिखल छनि एहि पोस्टके पूरा पढ़िए नहि पौताह प्रारब्धक अनुसार अपन गतिके प्राप्त करताह। मुदा जँ अहाँ एहि पाँति धरि एक एक आखरके पढ़ैत पहुँचल छी अपन प्रारब्धके चुनौती देबय चाहैत छी तँ भरोस राखू हम अहाँक संग छी, जखन आवश्यकता बुझी हमरा manubhaishow@gmail.com पर ईमेल करू। अपन अवाजमे रेकॉर्ड कए , विस्तारसँ अपन समस्याक जनतब दिय, अपन ज्ञान अनुभव धरि हम सहयोग करब।
एहि पोस्टमे बस एतबे।
अवाजक हार्डवेयर सॉफ्टवेयर पर जनतब आगुओ जारी रहत। अगिला पोस्टमे Tempo टेम्पो यानि एक निश्चित समयमे शब्द प्रक्षेपणक गति पर हमरा लोकनि चर्च करब।
शुभकामनाक संग विदा लैत छी।


मनोज पाठक 

वाक कला पर आधारित नियमित श्रृख्लांक - ६